राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण है शिक्षक की भूमिका
समाज और शिक्षा के बीच अत्यंत ही गहरा संबंध है । जिस प्रकार का समाज होगा उस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था होगी, और जिस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था होगी उसी प्रकार का समाज भी निर्मित होगा । इन दोनों ही परिस्थिति में किसी भी राष्ट्र के लिए एक ऐसे समाज एवं शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता महत्वपूर्ण होती है जिसका मूल उद्देश्य मूल्यपरक नागरिक तैयार करना होता है । इस महती कार्य में शिक्षक नामक संस्था का महत्वपूर्ण योगदान नजर आता है । शिक्षक अपने विद्यार्थी को केवल ज्ञान से समृद्ध एवं संतृप्त नहीं करता है अपितु वह उसके व्यक्तित्व एवं चरित्र को गढ़ने का कार्य करता है । वह अपने ज्ञान एवं कौशल के द्वारा प्रदत्त शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी के जीवन में सदैव उपस्थित रहता है, भले ही विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के उपरान्त एक नये जीवन में प्रवेश कर चुका हो । शिक्षा ज्ञानार्जन के साथ ही जीवन पद्धति के निर्धारण में भी अहम भूमिका निभाती है, एवं यह किसी भी देश, काल एवं परिस्थिति में प्रासंगिक है । किसी भी सामाजिक व्यवस्था के निर्धारण में वहाँ की शिक्षा व्यवस्था का अमूल्य योगदान होता है, साथ ही यह व्यवस्था ...