स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहे मिलावटी उत्पाद

 


विगत कुछ वर्षों में मिलावटी उत्पाद से जुड़ी कई घटनाएं देखने को मिली हैं | होली-दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के समय नकली मावा से बनी मिठाईयों के जरिये लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना हो या फिर यूरिया एवं हानिकारक रसायन मिले दूध एवं नकली पनीर को उपभोक्ताओं तक बिना किसी डर के पहुँचाना, भारतीय बाजारों में मिलावटी उत्पादों से बचना आज असम्भव सा नजर आता है | सब्जी और फलों को ताजा रखने के लिए हानिकारक रसायनों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है तो वहीं बाजार में बिक रहे नकली मसाले लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं | देश में हर साल नकली शराब से सैकड़ों लोग अपनी जान गँवा देते हैं, फिर भी नकली शराब का व्यवसाय निरंतर फल-फूल रहा है | पॉम आयल मिले सरसों तेल से लेकर चर्बीयुक्त देशी घी तक की, मिलावट की अनगिनत घटनाएं सामने आ चुकी हैं परन्तु मिलावटखोरों में न ही सरकार का डर नजर आता है और न ही मिलावटी उत्पाद बिकने बंद ही हुए हैं | कुछ दिन पहले गुजरात में यूरिया एवं डिटर्जेंट पाउडर से नकली दूध तैयार करने वाली फैक्ट्री पर छापे की खबर सुर्ख़ियों में थी | रोजाना हजारों लीटर दूध के पैकेट तैयार करने वाली फैक्ट्री में 1 लीटर दूध में हानिकारक पदार्थ मिलाकर 5-6 लीटर दूध तैयार किया जा रहा था | नकली दूध से तैयार उत्पाद जब घरों में पहुँचते हैं तो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से यह धीमा जहर न सिर्फ स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है अपितु इससे मानवता भी कलंकित होती है |

जीवनदायिनी दवाएं भी इन मौत के सौदागरों से अछूती नहीं हैं, हाल ही में दिल्ली पुलिस की एक टीम ने बिहार पुलिस के सहयोग से नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ करके 9 लोगों को हिरासत में लिया था | कुछ दिन पूर्व गाजियाबाद के मुरादनगर में लिव-52 नामक दवाई को बनाने वाली एक नकली कम्पनी का पता चला था, फैक्ट्री से  50 हजार से ज्यादा नकली टैबलेट जब्त की गयी जबकि नकली पैकेजिंग करने वाली सामग्री भी भारी मात्रा में बरामद की गयी थी | कोडिनयुक्त सिरप बेचने वाला वाराणसी का शुभम जायसवाल नकली दवाओं के व्यापार से एक ऐसा साम्राज्य तैयार कर लिया था जिसकी जद में न सिर्फ पूर्वांचल था अपितु उसकी जड़ें नेपाल और बांग्लादेश तक फैली थीं | नकली कफ सिरप को बाजार में पहुँचाने एवं उसकी खपत सुनिश्चित करने वाले भ्रष्टतंत्र ने अनगिनत लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया | ऐसे ही, कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने बाजार में नकली नमक एवं घी बेचने वाले एक गिरोह को पकड़ा था जो काफी समय से बड़ी कम्पनियों के पैकेट में नकली उत्पाद बेच रहा था | नकली दवाएं या तो बेअसर होती हैं या फिर इनके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं | कोविड के समय हम नकली दवा के गोरखधंधे की चपेट में आने से अनेक जिंदगियों को संकट में देख चुके हैं | आपदा में अवसर तलाशने वाले नकली दवाओं के माध्यम से प्रति दिन हजारों जीवन संकट में डाल रहे हैं जबकि सरकारी तंत्र का शिकंजा कुछ हद तक ही इन्हें नियंत्रित कर पाता है | केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) दवा बनाने वाली कंपनियों पर निगरानी रखने का कार्य तो करता है परन्तु देखा गया है कि कई बार नकली दवाओं की खेप बाजार में पहुँच जाती हैं | जुलाई 2025 में इस संगठन ने कुल 143 दवा नमूनों को मानक के अनुरूप नहीं पाया | औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में इन दवा नमूनों को मानक के अनुसार नहीं बताया गया | शायद ही कोई सप्ताह हो, जब किसी न किसी रूप में मिलावटी उत्पाद बनाने अथवा बेचने वाले व्यक्ति अथवा कम्पनी पर चर्चा न होती हो परन्तु यह चर्चाएं उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण करने में नाकाफी दिखती हैं |

भारतीय परम्परा में ग्राहक को ईश्वर का रूप बताया गया है परन्तु आज मनुष्य रुपी ग्राहक तो दूर ईश्वर को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद भी मिलावटखोरों की काली नज़र से नहीं बच पाया है | कुछ समय पहले उत्तराखंड के भोलेबाबा डेयरी द्वारा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को नकली घी सप्लाई करने की घटना ने न सिर्फ हिन्दू आस्था पर चोट पहुँचाने का कार्य किया अपितु हानिकारक घी से बने प्रसाद के लड्डुओं को श्रद्धापूर्वक खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने का कार्य भी किया | कई वर्षों तक धड़ल्ले से नकली घी बेचकर मुनाफा कमाने वालों ने न तो धार्मिक आस्था को महत्त्व दिया और न ही उनके लिए उस घी से निर्मित प्रसाद खाने वाले लोगों का स्वास्थ्य ही कोई विषय था, यदि विषय था तो सिर्फ अधिकाधिक मुनाफा कमाना |

अब प्रश्न यह उठता है कि भारतीय बाजारों में नकली खाद्य पदार्थ से लेकर नकली दवाओं का बाजार निरंतर बढ़ने के पीछे कारण क्या है ? क्या नकली उत्पाद बनाने अथवा बेचने वालों को कानून का भय नहीं है ? क्या भारत में उपभोक्ता कानूनों को और अधिक स्पष्ट एवं कठोर बनाने का समय आ गया है ? बाजार में उपलब्ध नकली उत्पादों के मकड़जाल से उपभोक्ताओं को कैसे बचाया जाय ? निश्चित रूप से यह यक्ष प्रश्न सरकार एवं जनता दोनों के सामने भी मौजूद दिखलाई देता है जिसपर शीघ्र ही विचार करने की जरूरत है | ऐसा नहीं है कि हमारे देश में नकली उत्पाद बनाने एवं बेचने वालों से जुड़ा कोई कानून नहीं है | भारत सरकार के वैधानिक निकाय के रूप में वर्ष 2006 से अस्तित्व में आया भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) खाद्य उत्पादों के मानकों को निर्धारित करने के साथ ही उन्हें लागू करता है | खाद्य व्यावसायों को लाइसेंस प्रदान करने के साथ ही यह नकली उत्पादों पर रोक की दिशा में कार्य करता है | 1986 में बने उपभोक्ता संरक्षण में समयानुकूल बदलाव करने के साथ ही सरकार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 लागू कर चुकी है जिसका उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है | यह कानून नकली अथवा मिलावटी उत्पाद बनाने अथवा बेचने वालों को 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास के साथ ही 1 से 5 लाख के जुर्माने की बात करता है | भारतीय न्याय संहिता 2023 में भी नकली उत्पाद बेचने वालों पर धारा 349 के तहत उचित दण्ड का प्रावधान है | केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण भी ग्राहक हितों की दिशा में कार्य करता हुआ दिखलाई देता है |

अनेकानेक सरकारी प्रयासों के बावजूद देश में मिलावटी उत्पादों की बिक्री शायद ही कम हुई है | इसका प्रमुख कारण भारतीय उपभोक्ताओं का अपने कानूनी अधिकारों के प्रति अज्ञानता एवं भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र की कुम्भकर्णी नींद ही है | नकली एवं असली उत्पादों की समझ विकसित करने वाले तंत्र का अभाव एवं सरकारी तंत्र की उदासीनता मिलावटखोरों का कार्य और आसान कर देती है | कम दाम के कारण कई बार ग्राहक मिलावटखोरों के बिछाए हुए जाल में खुद ही फँस जाता है तो वहीं कई बार अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में स्थानीय दुकानदार ग्राहक हितों को किनारे कर देता है | त्यौहारों के समय माँग एवं आपूर्ति में रिक्तता को भी मिलावटी उत्पाद पूरी कर देते हैं जिसकी ओर आसानी से सरकार की नजर नहीं जा पाती है | भारत जैसे बड़े बाजार में मिलावटी उत्पादों की बिक्री बढ़ने के यूँ तो अनेक कारण हैं परन्तु इनसे बचाव के तरीके अत्यंत सीमित ही दिखलाई देते हैं | निश्चित रूप से भारतीय बाजारों को नकली एवं मिलावटी उत्पादों से बचाना है तो सरकारी तंत्र में सुधार के साथ ही ग्राहकों को भी उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा | नागरिक कर्तव्य के रूप में अपने आस-पास निर्मित हो रहे अथवा बिक्री हो रहे नकली उत्पादों की सूचना अथवा शिकायत सम्बन्धित सरकारी विभाग को करनी होगी, साथ ही मिलावटी उत्पाद बनाने एवं बेचने वालों को कानून की दृष्टि से सजा दिलाने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना होगा | नकली उत्पादों की पहचान प्रक्रिया को लोगों को समझाने के साथ ही इससे जुड़ी प्रयोगशालाओं की पहुँच बढ़ानी होगी | सरकार उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े प्रावधान को जन-जन तक पहुँचाने के साथ ही मिलावटखोरी पर कड़े प्रहार के लिए नियमित अभियान चला सकती है | मिलावटखोरी के संगठित व्यापार को एक दिन में भले समाप्त नहीं किया जा सकता है परन्तु निरंतर प्रयास से एक दिन जरुर समाप्त किया जा सकता है |

 


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