संदेश

नयी सदी में लोगों को

मारकाट भ्रष्टाचार मिलेगा , बदला हुआ संसार मिलेगा । चुनाव की बीमारी होगी , चुनाव का बुखार मिलेगा । नयी सदी में लोगों.... वादों के पुल मिलेंगे , पैसों के स्कूल मिलेंगे । पानी का इन्जेक्सिन होगा , भोजन के कैप्सूल मिलेंगे । नयी सदी में ..... सौ परसेंट आरक्षण होगा , गरीबों का ही शोषण होगा । रूपये की ही दुनिया होगी , रूपये का सब खेल मिलेगा । नयी सदी में ....... जनरल स्टोर पर हेरोइन मिलेगी , चरस भाँग कोकीन मिलेगी । ऊँचा बनने के ख्वाब मिलेंगे , सबसे सस्ते शराब मिलेंगे । नयी सदी में .... चारों तरफ दिखावा होगा , आदि मानव सा पहनावा होगा । फैशन की दुनिया होगी , फैशन का मायाजाल मिलेगा । नयी सदी में ...... एक वोट सौ नेता मिलेंगे , बिन पेंदी के लोटा मिलेंगे । न तहजीब न संस्कार होगा , बाप से लड़ते बेटा मिलेंगे । नयी सदी में ..... आलसी सब मास्टर मिलेंगे , घुसखोर इंस्पेक्टर मिलेंगे । हर तरफ घोटाला होगा , घोटाले में लिप्त मिनिस्टर मिलेंगे । नयी सदी में .... पति पत्नी में...

दम तोड़ती व्हीसल ब्लोवर्स की आवाज़

एक तरफ जहाँ सरकार जनता से यह अपेक्षा कर रही है कि जनता भ्रष्टाचार मिटाने में उसका सहयोग करे वहीँ व्हीसल ब्लोवेर्स की दम तोड़ती आवाज़ सरकार की अपेक्षाओं पर पानी फेरती नजर आती हैं । सत्येन्द्र दुबे , यशवंत सोंवड़े या फिर शैला मसूद की आवाज़ का जिस बेरहमी से गला घोटा गया उससे सरकार की कथनी और करनी में फर्क आसानी से देखा जा सकता है । अधिकतर मामलों में तो व्हीसल ब्लोवेर्स की आवाज़ को सरकारी मशीनरी की भट्ठी में ही घुन्टते और कराहते हुए देखा गया और जब ये आवाजें हमेशा के लिए खामोश कर दी गयीं तो सरकार का यह बयान की हम व्हीसल ब्लोवेर्स की सुरक्षा के लिए दृढ संकल्पित हैं, मृतक की आत्मा को भी खून के आंसू रोने पर मजबूर कर देती है । भारत एक लोकतान्त्रिक देश है । किसी भी लोकतान्त्रिक देश में गोपनीयता अपवाद होना चाहिए क्योंकि भ्रष्टाचार रूपी पेड़ की जड़ें गोपनीयता रूपी उर्वरक पाकर और भी मजबूत हो जाती है जिन्हें उखाड़ फेकना आसान नहीं होता है । विग...

छपास रोग ( व्यंग्य )

कल मेरे एक छात्र ने मुझसे पूछा कि सर आप किस रोग को सबसे खतरनाक मानते हैं ? मैंने उत्तर दिया , वर्तमान में छपास रोग सबसे खतरनाक है । इसका वायरस जिस तेजी से लोगों को गिरफ्त में ले रहा है इससे आने वाले दिनों में इसके पुरे भारत में फैल जाने कि गंभीर आशंका है । प्रश्न पूछने वाले छात्र के साथ ही अन्य छात्रो के पल्ले भी कुछ नहीं पड़ा । आखिर पड़ता भी कैसे ? उन्होंने स्वाईन्न फ्लू , एड्स , हेपेतायितिस बी जैसी खतरनाक बिमारियों का नाम तो सुना था परन्तु इस रोग के बारे में उनका ज्ञान शून्य था । अभी मै कुछ बोलता कि तभी दुसरे छात्र ने पूछ लिया , सर ! यह रोग किस वायरस से फैलता है ? इसका इलाज क्या है ? इस रोग का लक्षण क्या है ? प्रश्नों कि एक लम्बी श्रंखला ने मेरे माथे पर सिकन ला दिया । मै कुछ देर के लिए शांत हो गया । मुझे शांत देखकर छात्र आपस में ईशारे से यह कहने का प्रयास कर रहे थे कि सर हम लोगों को बेवकूफ बना रहे है । भला ऐसा...