संदेश

असली दुकान

                                      क्या आप समस्याओं से परेशान हैं ? क्या आपको मनचाहा प्यार नहीं मिल रहा ? या फिर तमाम कोशिश के बावजूद सफलता नहीं मिल रही ? तो आज ही आप हमारे नजदीकी दुकान में संपर्क करें । अरे ! आप उधर कहाँ जा रहे ? आपका ध्यान किधर है ? बाबा बंगाली की असली दुकान इधर है । नक्कलों से सावधान रहें । सिर्फ हमारी दुकान ही बाबा जी की असली दुकान है इसलिए नक्कलों से सावधान रहें ।  जी हाँ ! भारत जैसे विविधताओं वाले देश में हर गली हर चौराहे और जिले से लेकर प्रदेश तक ऐसी असली दुकानों की भरमार है । इन दुकानों में आपके हर मर्ज की दवा भी उपलब्ध है । हर दुकानदार बस इस बात की प्रतीक्षा में लगा होता है कि आप जैसा ग्राहक सिर्फ एक बार उसके दुकान में आ जाए फिर क्या मजाल उसका कि वह दूसरी दुकान की तरफ रुख कर सके । ये दुकानें आपके हर समस्या का समाधान करने का सौ फीसदी दावा करती हैं और तो और बाबा बंगाली की दुकान तो समस्या न ख़त्म होने की दशा में एक मोटी रकम देने का भी दावा करती है । ह...

जाँच जारी है जनाब

कहते हैं सच को लाख छुपाया जाय यह छुपता नहीं है । यह किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाता है ।   भले ही इसे सामने आने में सालों लग जाय और इस सच को सामने लाने का काम किसी न किसी जाँच विभाग का होता है जिसे बाल की खाल निकाल कर सत्य की जड़ तक पहुँचना होता है । अब आप कहेंगे की आप के पड़ोसी शुक्ला जी भी तो हमेशा बाल की खाल निकालते रहते हैं । मसलन मोहल्ले में किसके यहाँ कौन आया? कहाँ से आया ? किस काम से आया ? इत्यादि का पता लगाकर ही दम लेते हैं । जाँच-पड़ताल की इस शोध उपलब्धि की प्रक्रिया में मन्दिर के घंटे की तरह कई बार बज भी चुके हैं फिर भी अपना काम बड़ी तल्लीनता के साथ करते हैं ।    खैर ! हमारे देश में कुछ जाँच इस शिद्दत के साथ की जाती है कि जब जाँच पूरी होती है तो जिसकी जाँच चल रही होती है वो दूसरी दुनिया में जाँच करा रहा होता है  और कभी कभी तो जाँच करने वाले की ही जाँच की नौबत आ जाती है । बिहार को ही लें, कुछ साल पहले पशुओं का चारा कोई खा गया था । अब खाने वाली चीज को किसी ने खा लिया तो इसमें हाय तौबा की नौबत कहाँ से आई, लेकिन नहीं ! जाँच तो जरुरी थी जनाब । ज...

मेरी कमीज़ ज्यादा सफ़ेद

                                                        सफ़ेद रंग प्रकृति का सबसे प्रिय रंग है क्योंकि इसमें सभी रंगों को समाहित करने का गुण होता है । यह इन्द्रधनुषी सभी रंगों को ऐसे समेट लेता है जैसे सागर नदियों के जल को । प्रकृति के बाद यह रंग सबसे ज्यादा भारतीय नेताओं को पसन्द है  इसीलिए अक्सर नेता जी काले को सफ़ेद करने में लगे रहते हैं और काले को सफ़ेद करने का खेल जीवन भर जारी रहता है । नेता जी के कपड़े तो मानों सफ़ेदी का प्रतिनिधित्व करते हैं और नेता जी इस रंग के ब्राण्ड अम्बेसडर होते हैं । क्या मजाल भ्रष्टाचार की कोई दाग नजर आ जाए ? अब रिन की सफ़ेदी हो या सर्फ़ एक्सेल की, नेता जी की कमीज हमेशा चमकती रहती है । अब आप कहेंगे कि इसमें बुरा क्या है? सफ़ेद कमीज़ तो चमकेगी ही । रही बात नेता जी की तो वो हमेशा ध...

कब तक लहू बहेगा?

कब तक लहू बहेगा भारत के वीर जवानों का कब तक देखेगा देश ये नंगा नॉच हैवानों का इससे पहले गद्दारों के मंसूबे सफल हो जाये रोज तिरंगा में लिपटा कोई शहीद घर आये कुचलना होगा सिर घर-बाहर के शैतानों का...... हर कोने में विषैले सर्प फन अपना फैला रहे भगत सुभाष की धरती ज़हन्नुम वो बना रहे घड़ियाली आँसू ऐसे कब तक तुम  बहाओगे शहादत पर वीरों के सियासी पारा चमकाओगे रोको क़त्ल अब तो तुम गाँधी के अरमानों का .... सौ कुत्ते मिल शेरों का अब ऐसे न संहार करें छिप कर सूअर के औलाद पीछे से न वार करें जागो दिल्ली के जमींदारों अब तुम न देर करो कह दो वीर जवानों से चुन-२ कुत्तों को ढेर करो सफाया जरुरी है अब उनके ठौर ठिकानों का ...... 

बरसाती मेंढक

चुनावी बरसात में आ जाते हो तुम, कुछ पल के लिए टरटराते हो तुम  चुनावी मौसम बहुत भाता है तुम्हे ,  हर वितर्क पर लार टपकाते हो तुम  कीचड़ से नाता बहुत है पुराना , कीचड़ से ही हमेशा नहाते हो तुम धर्म जाति पर होती है गिद्ध नज़र  जनता को आपस में लड़ाते हो तुम  जैसे ही ख़त्म हो जाता है चुनाव  न जाने कहाँ गुम हो जाते हो तुम 

परिवार

ख़ुशनसीब होते हैं जिनका परिवार होता है, सुख-दुःख बांटने वाला घर-संसार होता है मुश्किलें भी हार जाती हैं जंग उस सख्स से, जिसकी दुनिया में माँ का दुलार होता है बचपन गुजारता है जो ममता की छाँव में, दादा की गोद में दादी की दुआओं में छू लेता है वो आसमान की उचाईयों को, जिसकी दुनिया में पिता का प्यार होता है रूठ जाने पर झट से मना लेती है, सारी गलतियाँ हर बार माँ से छुपा लेती है दुखों के भँवर से निकल आता है वो, जिसकी दुनिया में बहन का दुलार होता है यूँ तो लड़ता है हर छोटी बात पर, उपहार में मिले हुए खिलौनों और सौगात पर दुश्मनों के छक्के छुड़ा आता है वो, जिसकी दुनिया में भाई का प्यार होता है अनजान दुनिया से जीवन में आती है, ताउम्र सुख-दुःख में साथ निभाती है तमाम झंझावातों से लड़ लेता है वो, जिसकी दुनिया में पत्नी का प्यार होता है 

सलाम

हिन्द के जवानों को सलाम लिख रहा हूँ, उनकी वीरता पर कलाम लिख रहा हूँ। शहादत के जिनकी हर बातें हैं अनोखी, गोली भी खाकर जो चढ़ते गये चोटी ।। ऐसे वीरों को आज पैगाम लिख रहा हूँ, हिन्द के जवानों को सलाम लिख रहा हूँ। आज़ादी की खातिर जो मिट गये दीवाने, दुश्मन के लहू से जो लिख गए फ़साने। मौत भी ना रोक सकी जिनके कदम, तिरंगे में लिपटे हुए घर आये  जो दीवाने।। उनकी ज़िन्दगी की उनवाँ लिख रहा हूँ, हिन्द के जवानों को सलाम लिख रहा हूँ। माँ की ममता और बहनों का प्यार, बाबूजी के सब अरमानों का जिनपे था भार।  बच्चों को सोता जो छोड़ गया था, होता था 'दीप' जो किसी के माथे का श्रृंगार ।। ख़त मैं उस वीर के नाम लिख रहा हूँ, हिन्द के जवानों को सलाम लिख रहा हूँ।