आरजू


ख्वाब मेरे जब कभी, हकीकत में बदलेंगे |
ख़ुदा कसम ख़ुदा से, हम तुम्हें माँग लेंगे ||
हैं मुश्किल हालात आज, आरजू-ए-सफ़र के |
आयेंगे तेरे दर पे, मेरे हालात जब बदलेंगे ||
मेरी मुहब्बत पर, रखना यकीन मेरे यार |
अँधेरी निशा से कल, बाहर हम निकलेंगे ||
तेरी यादें जो हो गयी, कभी रुसवा मुझसे |
खुद को ही खुद से, रुसवा हम कर लेंगे  ||
मर भी गये कल, तो निभाएंगे ‘दीप’ वादा |
तेरी धड़कनों में एहसास बन कर जीयेंगे ||

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

छपास रोग ( व्यंग्य )

उड़ान

थर्ड-जेंडर के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव जरुरी