प्लास्टिक कचरे का बढ़ता बोझ
पर्यावरण के समक्ष उपस्थित वर्तमान चुनौतियों में प्लास्टिक जनित चुनौती सर्व-प्रमुख है | प्लास्टिक किसी न किसी रूप में हमारे दैनिक गतिविधियों में इस प्रकार से सम्मिलित हो चुका है कि तमाम प्रयत्न के बावजूद हम अपने जीवन से इसे निकाल नहीं पा रहे हैं | एक तरफ सरकार द्वारा ‘प्लास्टिक मुक्त भारत की’ कोशिशें की जा रही हैं वहीं दूसरी तरफ प्लास्टिक कचरे का लग रहा अम्बार भविष्य में एक गम्भीर परिणाम की तरफ इशारा कर रहा है | आज सिंगल यूज़ प्लास्टिक के प्रयोग को रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है | केंद्र एवं राज्य स्तर पर प्लास्टिक का उपयोग रोकने के लिए कई कानून भी लागू हैं परन्तु इनका प्रभावी असर देखने को नहीं मिलता है | सरकार द्वारा निर्देश जारी होने के बाद भले ही कुछ दिनों तक लोग प्लास्टिक के उपयोग से बचते हैं परन्तु कुछ दिनों के बाद ही सब सामान्य हो जाता है | सरकारी मशीनरी की सक्रियता कम होती जाती है एवं प्लास्टिक उत्पाद निर्माता कम्पनियों के हौसले बुलन्द होते जाते हैं | दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति एवं इण्डियन पाल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार सालाना भारत में ३४ लाख टन प्...