संदेश

हिन्दी पत्रकारिता : संभावनाएं एवं चुनौतियाँ

चित्र
  विगत कुछ वर्षों में हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में कई बदलाव देखने को मिले हैं | कुछ बदलाव जहाँ सकारात्मक प्रतीत होते हैं तो वहीं कुछ बदलाव २०० वर्ष पूरे करने की ओर अग्रसर हिन्दी पत्रकारिता के समक्ष कठिन चुनौती प्रस्तुत करते नज़र आते हैं | प्रसार संख्या की दृष्टि से अंग्रेजी समाचार पत्रों से काफी आगे निकल चुके हिन्दी समाचार पत्र इसके समृद्ध संसार को दर्शाते हैं तो वहीं हिन्दी समाचार चैनल तेजी से बाजार विस्तार कर रहे हैं | अच्छी यातायात व्यवस्था, साक्षरता दर में सुधार, एवं उन्नत तकनीकी ने समाचार पत्रों को ग्रामीण पाठकों तक पहुँचाने का कार्य किया है, इसके साथ टी वी चैनल बड़ी तेजी से क्षेत्र विस्तार करने में लगे हैं जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों में भी सिर्फ दूरदर्शन सेवा प्राप्त करने की बाध्यता   समाप्त हो गई है | आज हिन्दी पत्रकारिता, अंग्रेजी एवं अन्य भाषायी पत्रकारिता से कोसों आगे नज़र आती है जिन्हें आई आर एस की रिपोर्ट पुष्ट करती है | टेलीविजन रेटिंग पॉइंट में भी हिन्दी समाचार चैनलों को आगे देखा जा सकता है | हिन्दी पत्रकारिता के बाजार विस्तार के पीछे हिन्दी भ...

बढ़ती जनसंख्या : आपदा या अवसर ?

भारत जनसंख्या की दृष्टि से चीन को पीछे छोड़ कर विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है | क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवाँ स्थान रखने वाले भारत में जनसंख्या बृद्धि दर उपलब्ध संसाधनों के लिए निरन्तर चुनौती प्रस्तुत करती रही है | जनसंख्या बृद्धि के कारण एक तरफ रोजगार से लेकर रोटी, कपड़ा, मकान का संकट बढ़ा है तो वहीं सबको शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्य, एवं स्वच्छ जल की सुनिश्चितता के साथ ही उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर भी व्यापक असर पड़ा है | सरकार के लिए सबको सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना निरन्तर कठिन होता जा रहा है, साथ ही विकसित भारत का लक्ष्य भी हमसे दूर होता जा रहा है | वर्ष 1950 में मात्र 36.1 करोड़ जनसंख्या वाले भारत की जनसंख्या 142.86 करोड़ हो गई है | संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट के अनुसार विश्व की कुल जनसंख्या 8 अरब के आंकड़े को पार कर चुकी है, इससे स्पष्ट होता है कि विश्व का हर छठां व्यक्ति भारतीय है | यह संख्या भले ही हमें गर्व की अनुभूति कराती है परन्तु साथ ही अनेकों चुनौतियों से भी दो-चार कराती है | यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है जब संयुक्त राष्ट्र की ही वैश्व...

राजनीतिक क्षेत्र में महिला भागीदारी महत्वपूर्ण

चित्र
  भारत एक लोकतान्त्रिक देश है जो सभी नागरिकों को समानता का अवसर प्रदान करता है | हमारा संविधान लैंगिक आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की मनाही करता है | संविधान में पुरुषों की भांति ही महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, एवं राजनैतिक स्तर पर समान अवसर की बात की गयी है | निश्चित तौर पर किसी भी देश का विकास उस देश की समग्र जनसंख्या द्वारा सक्रीय सहभागिता की माँग करता है, एवं पुरुष जनसंख्या के साथ ही महिला जनसंख्या की सहभागिता भी महत्वपूर्ण होती है | भारतीय स्वतंत्रता के बाद महिला वर्ग को सामाजिक, आर्थिक, एवं राजनैतिक स्तर पर अनेकों चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिससे देश के समग्र विकास पर भी असर देखने को मिला | विशेषतौर पर राजनीति के क्षेत्र में महिला प्रतिनिधियों की संख्या अत्यन्त कम रही जिससे राजनीतिक पटल पर उनकी आवाज को उतना महत्त्व नहीं मिला | इससे नीतियों का निर्माण करते समय भी वर्षों तक महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर कम ही ध्यान दिया गया | फलस्वरूप प्राचीन भारत में अर्धनारीश्वर के रूप में समान स्थान पाने वाली स्त्री पुरुषों से पीछे रह गयी | विगत कुछ वर्षों में सरकार ने न सिर्फ महिलाओं को आगे ...

देश हित में नहीं है बाजार-आधारित सामाजिक बदलाव

विगत कुछ वर्षों में भारतीय समाज में अनेकों बदलाव देखने को मिले हैं | इन बदलावों के केंद्र में बाजार निर्मित मूल्यों को देखा जा सकता है | बाजार बहुत ही तेजी से एक ऐसे भारतीय समाज का निर्माण कर रहा है जो देश हित में नहीं है | जनसंचार माध्यमों को उपकरण के रूप में उपयोग कर एक ऐसी पूंजीवादी व्यवस्था का मायाजाल तैयार किया जा रहा है जिसका दुष्प्रभाव अनेकों पश्चिमी देश देख चुके हैं | आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखने वाला बाज़ार उन पारिवारिक मूल्यों पर चोट कर रहा है जो वास्तव में हमें एक दुसरे से जोड़े रखने का कार्य करते थे | घर की संरचना में आँगन का महत्व था जो पारिवारिक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था, वहीं साझा रसोईघर की परम्परा परिवार नामक इकाई को मजबूती प्रदान करती थी | आज घर के दोनों महत्वपूर्ण हिस्से सामाजिक बदलाव का शिकार हो चुके हैं या यूँ कहें कि इन बदलावों ने पारिवारिक सदस्यों के बीच दूरी पैदा करने का कार्य किया है | पारिवारिक संवाद के केंद्र-बिन्दु रहे दोनों ही स्थान परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते थे जिससे ‘अवसाद’ जैसी समस्या का जन्म भी अकल्पनीय था | वर्तमान ...

महादेव हमारे

देवों के देव महादेव जी निराले हैं | करते हैं रक्षा जगत के रखवाले हैं || करके गरल-पान बचाया सभी को | गंगा जटाओं में ये त्रिनेत्रों वाले हैं || काशी है प्यारी कैलाश पर बसेरा है | गले में भुजंग तीनों लोकों में डेरा है || जितने गुसैल हैं उतने ही दयालु हैं | कण-कण में व्याप्त ये डमरू वाले हैं || जीवन में माँगों जो मिलता है इनसे | सच्चे हृदय से जो मांगे भक्त इनसे || नंदी सवार हो झट से चले आते हैं | भक्त कभी जब संकट में बुलाते हैं || पार्वती पति हैं ये सभी रुद्रावतार हैं | कर दें कृपा जिसपे उसकी नैया पार है ||

ख्वाहिश

उनकी गलियों में जाना बहुत हुआ,  बिसरी यादों से याराना बहुत हुआ | आँखों ने ढूँढा उन्हें हर बार बहुत,  पलकों से अश्क गिराना बहुत हुआ || न जाने होंगे वो किस हाल में अब,  उनसे बिछड़े हुए जमाना बहुत हुआ | बढ़ जाती हैं धड़कनें उन्हें याद कर,  यादों का किस्सा पुराना बहुत हुआ || मेरी रूह में अब भी वजूद है उनका,  यह सोचकर मुस्कुराना बहुत हुआ | लौट आयें 'दीप' वो मेरी ज़िंदगी में, रूठ कर मुझसे यूँ जाना बहुत हुआ ||

सियासत का एक नया अध्याय लिखता महापौर चुनाव

  हिन्दुस्तान की सियासत का केंद्र राजधानी दिल्ली इन दिनों एमसीडी में महापौर चुनाव को लेकर चर्चा में है | वैसे तो दिल्ली का दंगल केन्द्रीय राजनीति की दिशा तय करता है परन्तु ऐसा पहली बार है जब मेयर के चुनाव ने हलचल पैदा कर रखा है | दिल्ली की जनता एमसीडी चुनाव में वोट देकर अपना काम कर चुकी है, मीडिया चुनावी उलटफेर की कहानी बता-बता कर थक चुकी है, राजनीतिक पण्डित मेयर के बारे में अटकले लगाकर शांत हो चुके हैं, परन्तु लगभग ३ महीने होने के बावजूद दिल्ली एमसीडी का सिंहासन अपने प्रतिनिधि की ओर टकटकी लगाये है | आम आदमी पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रहा नूराकुश्ती का खेल समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा | राजनीतिक विशेषज्ञों के तमाम आँकलन गलत साबित हो रहे हैं तो वहीं मुख्यमंत्री एवं लेफ्टिनेंट गवर्नर के बीच की तल्खी भी लगातार बढ़ती जा रही है जिसने चुने हुए पार्षदों की धड़कन भी बढ़ा दिया है | सड़क से लेकर सदन तक दोनों प्रमुख पार्टियों ने तरकश के सभी तीर आजमा कर देख लिया है, फिर चाहे गाली-गलौज जैसा अमर्यादित व्यवहार हो अथवा एक दुसरे के ऊपर कुर्सियाँ फेंकने जैसा असभ्य आचरण, धरना प्रदर्शन जैसी...