ख्वाहिश

उनकी गलियों में जाना बहुत हुआ, 

बिसरी यादों से याराना बहुत हुआ |

आँखों ने ढूँढा उन्हें हर बार बहुत, 

पलकों से अश्क गिराना बहुत हुआ ||

न जाने होंगे वो किस हाल में अब, 

उनसे बिछड़े हुए जमाना बहुत हुआ |

बढ़ जाती हैं धड़कनें उन्हें याद कर, 

यादों का किस्सा पुराना बहुत हुआ ||

मेरी रूह में अब भी वजूद है उनका, 

यह सोचकर मुस्कुराना बहुत हुआ |

लौट आयें 'दीप' वो मेरी ज़िंदगी में,

रूठ कर मुझसे यूँ जाना बहुत हुआ ||

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