संदेश

बनारस

                                                                                          धर्म, अध्यात्म और परंपरा की विरासत को सहेजे विश्व की प्राचीनतम नगरी में से एक काशी यूँ तो ज्ञान के सबसे बड़े केंद्र के रूप में जानी जाती है परन्तु इसकी सबसे बड़ी पहचान यहाँ की गंगा जमुनी संस्कृति है । वरुणा और असी नदी की पलकों में समाया यह शहर सभी धर्मों को समान महत्व देने के लिए जाना जाता है । यहाँ भारत रत्न बिस्मिल्ला खां की शहनाई की धुन और पं किशन महाराज के तबले की थाप की जुगलबंदी का रस है तो पं मालवीय और शिवप्रसाद गुप्त के सपनों को मूर्त रूप देते विद्द्या के केंद्र भी, विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा बुद्ध का उपदेश स्थल है तो कबीर का प्राकट्य स्थल भी ।भगवान शंकर के त्रिशूल पर अवस्थित विश्व के इस अनूठे शहर ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरूपयोग

                                                      हमारा संविधान प्रत्येक भारतीय नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है साथ ही ८ युक्तियुक्त निर्बन्धन के माध्यम से इसकी स्वतंत्रता की परिधि भी सुनिश्चित करता है। १९ (१)(क) में वर्णित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमे स्वछन्द होने की छुट नहीं देती है। परन्तु विगत कुछ वर्षों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं स्वच्छंदता के बीच की पतली रेखा धुंधली होती नजर आयी है। जे एन यू में हुई घटना अभिव्यक्ति के नाम पर मिली स्वतंत्रता का न सिर्फ दुरूपयोग है बल्कि देश की संप्रभुता एवं अखंडता पर भी गहरी चोट करती है ।  ऐसा नहीं है की इस तरह की ये पहली घटना थी। जे एन यू में इस तरह की आवाज का फैशन पहले से रहा है परन्तु इस बार तथाकथित छात्रों ने सारी हदें पार कर दी। सरकार के खिलाफ़ बोलने से शुरू हुआ ये सफ़र सोशल मीडिया के युग में सारी सीमाएं लाँघ चुका है। जो लोग देश विरोधी नारे लगाने वाले छात्रों का समर्थन कर...

आतुर ख़बरिया चैनलों की दिशा

                                           ख़बरिया चैनल व्यक्ति की जानने की इच्छा व जिज्ञासा को शांत करने के साथ ही उन्हें स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सूचनाओं तथा गतिविधियों से अवगत कराते हैं । २४*७ की रथ पर सवार इन चैनलों का काफ़िला जैसे- जैसे आगे बढ़ता जा रहा है, सामाजिक सरोकार जैसा मीडिया का बुनियादी तत्व इनसे गायब होता जा रहा है । सबसे आगे और सबसे तेज की अवधारणा ने न सिर्फ ख़बरों की गुणवत्ता को प्रभावित करने का कार्य किया है अपितु कई अवसरों पर इनकी विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है । आज कतिपय लोगों द्वारा सत्ता का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रसारण चैनल शुरू किये जा रहे हैं ।  सरकार पर दबाव बनाना हो या फिर किसी मुद्दे को खड़ा करना, इन चैनलों का जवाब नहीं   ।  उपभोक्ता बाज़ार को लेकर चैनलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने ख़बरिया चैनलों की रुपरेखा ही बदलकर रख दिया है । अब ये चैनल तटस्थ रहकर ख़बरों को प्रस्तुत नहीं करते बल्कि कभी आलोचक तो कभी निर्णयकर्ता ...

देश का हाल

ये देश उबल रहा है ये देश जल रहा है, सियासी गलियारों में नफ़रत का खेल चल रहा है। वादों की हांडी पर देश के अरमानों को रख, गिरगिट से तेज नेताओं का रंग बदल रहा है। पथराई आँखों में 'दीप ' उम्मीद की रोशनी भी नहीं, बंजर जमीं पर जैसे हल चल रहा है। क्यूँ ? ख़ुदकुशी को मजबूर हो रहा अन्नदाता, जिसके मेहनत से सबका पेट पल रहा है। गीता बाइबल और कुरान आज हो गयीं बेजान, धर्म के नाम पर लहू बहा रहा है इन्सान। मन्दिर और मस्जिद की बदल रही हैं फिजाएं, राम रहीम को लड़ाने का खेल चल रहा है। बेगुनाहों के मौत पर भी सियासत होने लगी है, हैवानियत से हार इंसानियत रोने लगी है झूठे मक्कारों ने कर ली है तरक्की इतनी, हर गली- हर तरफ इन्हीं का खेल चल रहा है। कभी कहलाता था देश हमारा सोने की चिड़िया, रिश्तों की पाठ हमसे पढ़ती थी दुनिया अब तो अपने आँगन में महफ़ूज नहीं मासूम, हर घर के अन्दर ही कोई रावण पल रहा है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या स्वछन्दता ?

                                        अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या स्वछन्दता ?                                                                         डॉ  सुनील कुमार मिश्र हमारा संविधान प्रत्येक भारतीय नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है साथ ही ८ युक्तियुक्त निर्बन्धन के माध्यम से इसकी स्वतंत्रता की परिधि भी सुनिश्चित करता है। १९ (१)(क) में वर्णित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आम जन के साथ ही मीडियाकर्मियों को भी मिली हुई है और अमेरिका की तरह अलग से प्रेस को कोई अधिकार नहीं मिले हैं।  सामाजिक उत्तरदायित्व का सिद्धान्त भारतीय मीडिया को और भी जवाबदेह बनाता है परन्तु विगत कुछ वर्षों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं स्वच्छंदता के बीच की पतली रेखा धुंधली होती नजर आयी है। कुछ दिन पहले ए...

तेरे बिन

हर ख्वाब अधूरे लगते हैं , हर रात अधूरी लगती है। जिन साँसों में तुम बँसते हो, वो साँस अधूरी लगती है। हर दिन ग्रहण का होता है , हर रात अमावस होती है। तेरे यादों की गलियों में , मेरी आँखें जमकर रोती हैं। सावन पतझड़ लगता है , हर मौसम उखड़ा लगता है फूलों से ख़ुश्बू आती नहीं , हर उपवन उजड़ा लगता है 

ये वादा रहा

किया है जो वादा निभायेंगे दोस्तों, दरिया के पार एक दिन जायेंगे दोस्तों रोकेगा तूफां जो भी मेरी कश्ती को, हर उस तूफां से हम टकराएंगे दोस्तों  गिरना उठना तो जीवन का दस्तूर है, वक़्त कम है और जाना बहुत दूर है  तोड़ सकेगा न कोई मेरे हौसले को , एक दिन सभी को दिखलायेंगे दोस्तों  ये माना  मेरी मुश्किलें हैं बड़ी, हर मुश्किल से एक दिन पार पायेंगे दोस्तों  तुम करना उस दिन का इंतजार, खुशियों संग घर एक दिन आयेंगे दोस्तों