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भारतीय वेब-सीरिज : संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ

  भारतीय मनोरंजन की दुनिया में वेब-सीरिज भले ही नई विधा हो परन्तु जिस तेजी से यह विधा लोगों के मध्य लोकप्रिय हो रही है, आने वाले दिनों में बड़े पर्दे का सिनेमा हो या फिर टेलीविजन की दुनिया में वर्षों से राज करने वाले सोप ओपेरा , मनोरंजन परिदृश्य में बदलाव सुनिश्चित है | पिछले कुछ समय में ‘ओवर द टॉप’ प्लेटफार्म की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, विशेष रूप से युवाओं ने मनोरंजन के इस पिटारे को खूब पसन्द किया है | नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, जी-५, जियो सिनेमा, ऑल्ट बालाजी, वूट, सोनी लिब, एवं डिज्नी हॉटस्टार जैसे प्लेटफार्म कहीं भी, कभी भी वेबसीरिज को देखने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं जो वर्तमान पीढ़ी के युवाओं के लिए सबसे मुफीद जान पड़ता है | वर्तमान युग इन्टरनेट का युग है, जहाँ विश्व के किसी कोने में निर्मित किसी भी प्रकार की अन्तर्वस्तु से आसानी से जुड़ा जा सकता है | वेब-सीरिज को बाजार प्रदान करने में इन्टरनेट जैसी तकनीकी का विशेष योगदान नजर आता है | स्मार्टफोन की उपलब्धता एवं सस्ते इन्टरनेट दर ने इस नये माध्यम को न सिर्फ महानगरों के उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का कार्य किया है अपितु छोटे शहरों मे...

किसानी में का बा ?

  खेत बा खलिहान बा, टूटल मकान बा बरखा बुन्नी होत नईखे, रूठल आसमान बा ज़ेब में कड़की छाईल बा, दू सौ अरमान बा किसानी में का….. आठ घंटा लाइट बा, यूरिया क भाव टाइट बा असवों भाव गिरल बा, मंडी में स्ट्राइक बा दू जून के जुगाड़ में, रोज ही पंचाइत बा किसानी में का….   डीजल क भाव बढ़ल बा, अमीन दुआरे अड़ल बा कुछऊ बुझात नईखे, कईगो नेवता पड़ल बा रात के नींद आवत नईखे, दुआरे गल्ला पड़ल बा किसानी में का…. पप्पुआ क फीस देवे के बा, मलकिन के साड़ी लेवे के बा माई क आपरेशन बा, केहू से कर्जा लेवे के बा नून तेल लकड़ी खातिर, जीवन क नैया खेवे के बा किसानी में का… खाता में पैसा आईल बा, लेखपाल क साइन लेवे के बा धान क बीया भेवे के बा, खेत में पानी देवे के बा         स्टोर में आलू रखाइल बा, बुचिया क शादी जोहे के बा किसानी में का…. नेता क आश्वासन बा, आँख मुदले प्रशासन बा घोषणा पत्र क हिस्सा बा, किसानन खातिर भाषण बा हजार गो जंजाल बा, सूद-खोरन क मकड़जाल बा किसानी में का…..

गुरू

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सूरज की तपिश चाँद की छाया है गुरू, ईश्वर को भी सही राह दिखाया है गुरू | गुरू ही सिखाता हर मुश्किल से लड़ना, ईश्वर का रूप ईश्वर की काया है गुरू || कभी विश्वामित्र कभी परशुराम है गुरू, कभी राधाकृष्णन कभी कलाम है गुरू | दधिची सा त्याग गुरू ही कर सकता, शिष्य के लिए ईश्वर का वरदान है गुरू || असम्भव को सम्भव बना देता है गुरू,   जीवन को उत्सव बना देता है गुरू | मिल गया गुरू जो अबोध कबीर को,   जीवन का सार समझा देता है गुरू || सागर सा ज्ञान का भण्डार है गुरू,   भविष्य निर्माता व सृजन-संसार है गुरू | तय कराता अँधेरे से प्रकाश का सफ़र, शिष्य के जीवन का खेवनहार है गुरू || भूत के रहस्य से पर्दा उठाता है गुरू, वर्तमान का मार्ग सुगम बनाता है गुरू | समझाकर जीवन मूल्य ‘दीप’, सहस्रतार्ची बन भविष्य की राह दिखाता है गुरू ||

मैं केजरीवाल बोल रहा हूँ… ( व्यंग्य )

( मनीष जी केजरीवाल जी से मिलने उनके घर पर आते हैं, दिल्ली के हालात पर दोनों के बीच काफी देर तक चर्चा होती है | प्रस्तुत है दोनों के बीच हुई बातचीत का मुख्य अंश…) मनीष- क्या हुआ भाई ? आप इतने परेशान क्यों दिख रहे हो ? केजरीवाल- क्या बताऊँ मनीष ? दिल्ली की जनता हमारी असलियत जान चुकी है | जब भी फोन करता हूँ, उल्टा ही सुनाती है.. वादाखिलाफी करने का आरोप वो लगाती है | पता नहीं उनको भड़का रहा है कौन ? मनीष- आप चिंता न करो भाई.. आप फिर से फ़ोन लगाओ.. देखता हूँ मैं उठाता है कौन ? केजरीवाल- फिर से फ़ोन लगाते हैं…. रिंग बजती है.. दूसरी तरफ से एक महिला फ़ोन उठाती है… महिला- हैल्लो कौन ? केजरीवाल- अरे हम बोल रहे हैं | महिला- कौन ? किससे बात करनी है ? केजरीवाल – मुझे नहीं जानती ? महिला- नहीं जानती.. केजरीवाल- मुझे नहीं पहचानती ? महिला- बोला न.. नहीं पहचानती.. आइन्दा इस नम्बर पर फोन नहीं करना..कहकर फ़ोन कट कर देती है | मनीष- भाई ये तो पोपट हो गया.. मात्र ५ महीनों में ही लोग आपकी आवाज तक भूल गये..लगता है जनता आपसे नाराज है | केजरीवाल- ऐसी बात नहीं.. जनता विश्वास करती है, मेरे ए...

हिंदुस्तान के प्रहरी

देश के असली हीरो का, आईये हम सम्मान करें | शहीद हुए हैं शूरवीर, शहादत पर अभिमान करें || कर्तव्य मार्ग पर चलके,  प्राण आहुति दे गये वो | हम भी तो कम से कम, नीजि स्वार्थ बलिदान करें || हिंदुस्तान के प्रहरी हैं वो , भारत माँ के सब बेटे हैं | शान तिरंगा की रख, माँ भारती की गोद में लेटे हैं || अखंड भारत के सपने संग, सरहद पर जो डटे हुए | आपस में लड़कर हम सब, कम उनका न मान करें || कर लेगा मनमानी अपनी, ड्रेगन की औकात नहीं | जब तक हिन्द के रक्षक हैं, डरने की कोई बात नहीं || राजनीति से ऊपर उठिये, यह साथ चलने की बेला है | चक्रव्यूह में फंसा अभिमन्यू, फिर से आज अकेला है || दुश्मन का दम्भ तोडने, जो बैठे हैं दुश्मन की छाती पर | वीर रणबाकुरों का मिलकर, हमसब ही गुणगान करें ||

आरजू

ख्वाब मेरे जब कभी, हकीकत में बदलेंगे | ख़ुदा कसम ख़ुदा से, हम तुम्हें माँग लेंगे || हैं मुश्किल हालात आज, आरजू-ए-सफ़र के | आयेंगे तेरे दर पे, मेरे हालात जब बदलेंगे || मेरी मुहब्बत पर, रखना यकीन मेरे यार | अँधेरी निशा से कल, बाहर हम निकलेंगे || तेरी यादें जो हो गयी, कभी रुसवा मुझसे | खुद को ही खुद से, रुसवा हम कर लेंगे   || मर भी गये कल, तो निभाएंगे ‘दीप’ वादा | तेरी धड़कनों में एहसास बन कर जीयेंगे ||

मजदूर ही तो हैं

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मरते हैं तो मरने दो मजदूर ही तो हैं, बेबस लाचार गरीब मजबूर ही तो हैं   | छले जाते हैं ये ताउम्र ज़िन्दगी में, वक्त के मारे मिट्टी के कोहिनूर ही तो हैं || दुःख में मुस्कुराने का हुनर आता इन्हें, सदियों से ही कुचला जाता है जिन्हें   | कीड़े-मकोड़े से ज्यादा वजूद नहीं कोई, सुख गढ़ते हैं पर सुख से दूर ही तो हैं || गाँव से शहर भाग आते हैं अभागे, लाते हैं साथ ये जिम्मेदारियों के धागे | बहन का सम्मान और पिता की लाठी, माँ के आँखों के ये नूर ही तो हैं   || गर्मी जाड़ा हो या भयंकर बरसात, सुहानी सुबह हो या फिर काली रात | हर रोज ही अपनी हड्डियों को गलाते, खुद के अरमान जलाते तन्दूर ही तो हैं || आपके सपनों का महल हैं ये बनाते, भगा देते हैं आप साहब इनको रुलाके | बहुत कुछ कहती हैं नम आँखें इनकी, कसूर इतना है कि बेक़सूर ही तो हैं || बड़ा दर्द है ‘दीप’ इनकी सिसकियों में मोल नहीं जिनका सत्ता की गलियों में | मौत पर बहा देते कुछ घड़ियाली आँसू, राजशाही के लिए ये गैर-जरूर ही तो हैं || जिस शहर को अपने पसीने से सींचा, उस शहर से लौट रहे बेगरूर ही तो हैं | भू...