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राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण है शिक्षक की भूमिका

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  समाज और शिक्षा के बीच अत्यंत ही गहरा संबंध है । जिस प्रकार का समाज होगा उस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था होगी, और जिस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था होगी उसी प्रकार का समाज भी निर्मित होगा । इन दोनों ही परिस्थिति में किसी भी राष्ट्र के लिए एक ऐसे समाज एवं शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता महत्वपूर्ण होती है जिसका मूल उद्देश्य मूल्यपरक नागरिक तैयार करना होता है । इस महती कार्य में शिक्षक नामक संस्था का महत्वपूर्ण योगदान नजर आता है । शिक्षक अपने विद्यार्थी को केवल ज्ञान से समृद्ध एवं संतृप्त नहीं करता है अपितु वह उसके व्यक्तित्व एवं चरित्र को गढ़ने का कार्य करता है । वह अपने ज्ञान एवं कौशल के द्वारा प्रदत्त शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी के जीवन में सदैव उपस्थित रहता है, भले ही विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के उपरान्त एक नये जीवन में प्रवेश कर चुका हो । शिक्षा ज्ञानार्जन के साथ ही जीवन पद्धति के निर्धारण में भी अहम भूमिका निभाती है, एवं यह किसी भी देश, काल एवं परिस्थिति में प्रासंगिक है । किसी भी सामाजिक व्यवस्था के निर्धारण में वहाँ की शिक्षा व्यवस्था का अमूल्य योगदान होता है, साथ ही यह व्यवस्था ...

उत्तम प्रदेश की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

देश में सर्वाधिक आबादी वाला राज्य अब आर्थिक स्तर पर भी नित् नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, इस बात का संकेत उत्तर प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में देखने को मिलता है । आर्थिक विकास की रफ़्तार और जीडीपी में तेज बढ़ोत्तरी इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब उत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है । कुछ वर्ष पहले तक जिस प्रदेश की बीमारू राज्य के रूप में गिनती होती थी, और ऐसा कहा जाता था कि यह राज्य रोजगार देने के मामले में कई राज्यों से पीछे है । कभी नौकरी की तलाश में मुंबई-दिल्ली जैसे शहरों की ओर पलायन करने वाले युवा अब अपने गाँव-शहर में ही उद्यम स्थापित कर स्वरोजगार की नई पटकथा लिख रहे हैं  विगत एक दशक में इस राज्य का कायाकल्प हो चुका है तो इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कुशल नेतृत्व एवं राज्य के युवा शक्ति में उनका निवेश नजर आता है । प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अनेक योजनाओं को शुरू किया है जिसके केंद्र में युवा वर्ग है । मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना हो अथवा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, युवाओं को स्वावलंबी बनाने के साथ ही उत्तर प्रदेश की आर्थि...

सांस्कृतिक जागरण के अग्रदूत गोस्वामी तुलसीदास

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  अपनी आध्यात्मिक कृति ‘रामचरितमानस’ के माध्यम से अमर रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास न सिर्फ आध्यात्मिक जागरण के सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं अपितु सांस्कृतिक जागरण के पुरोधा के रूप में भारतीय जनमानस के मानसिक पटल पर आज भी उनका नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है । धर्मशास्त्र एवं वेदों पर अच्छी पकड़ रखने वाले गोस्वामी जी ने अपने भक्ति काव्य के माध्यम से मुग़ल साम्राज्य में खंडित हो रही धार्मिक मान्यताओं को पुनर्जीवित करने के साथ ही ईश्वर के प्रति आस्था को भी बल प्रदान किया । एक तरफ मुग़ल साम्राज्य के शासक सनातन धर्म को मिटाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ हिंदी साहित्य के इस महान कवि ने रामभक्ति की ऐसी लहर पैदा कर दी जिसने सनातन प्रेमियों को नई ऊर्जा देने का कार्य किया । १६वीं सदी में मुग़ल शासक हिन्दू मंदिरों को तोड़कर हिन्दुओं को सांस्कृतिक चोट पहुँचा रहे थे परंतु तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ के माध्यम से हिन्दुओं के घरों में ही भक्ति मंदिर स्थापित कर दिया । ऐसा कहा जाता है कि ‘रामचरितमानस’ की रचना के पीछे उनके आराध्य हनुमान जी का आशीर्वाद था । वाराणसी के तुलसीघाट पर रामभक्ति में डू...

नदियों का हाल बुरा है

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  गंगा मैली हो रही, यमुना का हाल बुरा है | कावेरी भी ठीक नहीं, जल रेत संग पड़ा है || हिंडन, बेतवा, घाघरा तलाश रही हैं स्वयं को | सहस्र नदियों को अब, बारिश का आसरा है ||   कैद हुई बांध में कुछ, कुछ मानचित्र से लापता | गंदगी के बोझ संग, कुछ पूछ रही अपना पता || वरुणा आज सिसक रही, असी का पता नहीं | कृष्णा, गोदावरी, मंदाकिनी पूछती हैं पता कहीं || ताप्ती और महानदी, बदल रहीं हैं रूप निरंतर | ब्रह्मपुत्रा, कोसी, नर्मदा, दिखा चुकीं रूप भयंकर || पर्यटकों की बाढ़ सी, आती है गंगा घाट पर | हँसती हैं नदियां, मानव के क्रिया-कलाप पर || नदियों का जीवन बदला, बदल गया रंग-रूप | कालीदास बना है मानव, विनाश देख है चुप || रोके नहीं कदम जो, आगे विनाश भयंकर होगा | बिन नदियों के ‘दीप’, सोचो क्या मंजर होगा || लहूलुहान कर नदियों को, क्या तुम बच पाओगे | देर किये अगर अब भी, पीछे देख पछताओगे ||  

प्यार भरी जिंदगी

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दिल जब कभी आपसे अजनबी हो जाये  | खुद से प्यारी किसी की ख़ुशी हो जाये ||  दर्द में भी हो उसके सलामती की दुआ | प्यार से सराबोर जब ज़िन्दगी हो जाये || मन को गुदगुदा जाये हवा का झोका कोई | नजरें जब ढूढ़ने लगे मिलने का मौका कोई || यादों के गलियों में नजर आये चेहरा वही | जीने की वजह जब दिलकशी हो जाये | लगने लगे जब कोई हर  बेचैनी की दवा | उसके बिना काटों भरी लगने लगे हवा || कर दो इज़हार ‘दीप’ अपनी मुहब्बत का |  प्यार ही पूजा जब प्यार वन्दगी हो जाये ||

स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहे मिलावटी उत्पाद

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  विगत कुछ वर्षों में मिलावटी उत्पाद से जुड़ी कई घटनाएं देखने को मिली हैं | होली-दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के समय नकली मावा से बनी मिठाईयों के जरिये लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना हो या फिर यूरिया एवं हानिकारक रसायन मिले दूध एवं नकली पनीर को उपभोक्ताओं तक बिना किसी डर के पहुँचाना, भारतीय बाजारों में मिलावटी उत्पादों से बचना आज असम्भव सा नजर आता है | सब्जी और फलों को ताजा रखने के लिए हानिकारक रसायनों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है तो वहीं बाजार में बिक रहे नकली मसाले लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं | देश में हर साल नकली शराब से सैकड़ों लोग अपनी जान गँवा देते हैं, फिर भी नकली शराब का व्यवसाय निरंतर फल-फूल रहा है | पॉम आयल मिले सरसों तेल से लेकर चर्बीयुक्त देशी घी तक की, मिलावट की अनगिनत घटनाएं सामने आ चुकी हैं परन्तु मिलावटखोरों में न ही सरकार का डर नजर आता है और न ही मिलावटी उत्पाद बिकने बंद ही हुए हैं | कुछ दिन पहले गुजरात में यूरिया एवं डिटर्जेंट पाउडर से नकली दूध तैयार करने वाली फैक्ट्री पर छापे की खबर सुर्ख़ियों में थी | रोजाना हजारों लीटर दूध के पैकेट तैयार ...

शिक्षा में भारतीयता को स्थापित करेगा भारत शिक्षा अधिष्ठान

  शिक्षा में भारतीयता स्थापित करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार द्वारा 15 दिसम्बर 2025 को लोकसभा में एक ऐतिहासिक विधेयक पेश किया गया | ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक- 2025 ’ नामक इस विधेयक के जरिये सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मैकाले शिक्षा पद्धति के प्रभाव से पूर्णतया मुक्त करने के संकल्प को पूरा करने में वह कोई कमी नहीं रखना चाहती है | केंद्र की मोदी सरकार ने 5 वर्ष पूर्व ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लाकर यह स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारत और भारतीयता सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगी | शिक्षा में भारतीयता को स्थापित करने के लिए जो भी प्रयास करने होंगे सरकार द्वारा किया जायेगा | विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को उसी प्रयास की दिशा में बढ़ाया गया एक सार्थक कदम कहा जा सकता है | संसद में प्रस्तुत इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समयानुकूल परिवर्तन के साथ ही एक ऐसे शीर्ष शिक्षा आयोग का गठन करना है जो शैक्षणिक उन्नयन की पटकथा लिख सके | विपक्ष द्वारा हंगामा करने के पश्चात् प्रस्तुत विधेय...

नई सुबह

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  तिमिर छंटते ही, खुशनुमा सहर होगी | पाँव जमीं पे,   आसमां पे नज़र होगी || काँटे अनगिनत हैं राह में, तो क्या हुआ | फूलों से संजी कल, अपनी डगर होगी || रोक ले कदम जो, तूफानों में दम नहीं | बदल दे हवा का रूख, वो मौसम नहीं || उजाले में परछाईयों की, परवाह नहीं | मेरे किरदार में चमक, उम्र भर होगी || हौसलों से बाँध रखा है, कश्ती की डोर | साहिल तक पहुंचेगी, चाहे भँवर होगी || आज तन्हा सफ़र है, कल होगा कारवां | इतिहास के पन्नों में, कहानी अमर होगी || रेत पर भी बन जायेंगे,   पक्के आशियां | जमीं से जुड़ने की, अंगद सी हुनर होगी || आज जिक्र न हो ‘दीप’, तो कोई बात नहीं | मेरे जाने के बाद, मेरी चर्चा मगर होगी ||  

छोटी सी ज़िन्दगी

  क्या गलत क्या सही है दोस्तों | इतनी ही समझ नहीं है दोस्तों || ख़ामोश आँखें कुछ कहती नहीं | रिश्तों में बर्फ़ जमी है दोस्तों || जिसके मिलने से थी हर ख़ुशी | बन गया अजनबी है दोस्तों || बढ़ गयी हैं दूरियां इस कदर | कोई नज़र जैसे लगी है दोस्तों || बढ़ रहे रोज उलझनों के धागे | ज़िन्दगी ये उलझ रही है दोस्तों || रेत पे खड़ी है दिवार रिश्तों की | धीरे-धीरे   गिर रही है दोस्तों || आओ साफ करते हैं उस धूल को | नफरतों की ‘दीप’ जमी है दोस्तों || गिले-शिकवे मिटा लग लें गले | बड़ी छोटी सी ज़िन्दगी है दोस्तों ||  

हर युग में प्रासंगिक रहा है शिक्षक

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  विगत कुछ वर्षों में तकनीकी के क्षेत्र में हुए बदलाव ने शिक्षण व्यवस्था को भी प्रभावित किया है, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार ने शिक्षण पद्धति पर व्यापक असर डाला है, और बदलते परिवेश में असंख्य लोग शिक्षक नामक संस्था की आवश्यकता और प्रासंगिकता पर प्रश्नचिन्ह खड़े करने लगे हैं | उनको लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विद्यार्थी को अंतर्वस्तु की जिस दुनिया में ले जा सकता है, उस दुनिया में शिष्य को पहुँचाना किसी भी शिक्षक के लिए सम्भव नहीं है | निश्चित रूप से तकनीकी ने शिक्षण प्रक्रिया को बदला है, एवं शिक्षार्थी के लिए इंटरेक्टिव ज्ञानार्जन का एक विकल्प प्रदान किया है | तथ्य को टेक्स्ट, आवाज, एवं दृश्य के संगम के रूप में प्रस्तुत करके उसकी ग्राह्यता को बढ़ाकर आधुनिक तकनीकी ने एक नया परिदृश्य तैयार कर दिया है जो तेजी से विद्यार्जन के केंद्र रहे शिक्षक नामक संस्था के सामने चुनौती प्रस्तुत कर रही है | आज ए आई के कई टूल्स उपलब्ध हैं जो विद्यार्थी को दत्त-कार्य पूरा करने में सहायता करते हैं तो वहीं कई ऐसे टूल्स भी हैं जो शिक्षक को शिक्षार्थी के कार्य की समीक्षा करने एवं मूल्...

उड़ान

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  तूफान कहाँ रोक पाते, हौंसले की उड़ान को | बादल कहाँ ढक पाते, नीले आसमान को || मुश्किलों के पहाड़ से, घबराना न तुम कभी | मेहनत के हथौड़े से, तोड़ देना हर चट्टान को || पाँव के नीचे रेत अगर, कभी फिसलने लगे | बर्फ बन खुशियाँ कभी, तेज पिघलने लगे || जीवन के झंझावातों से, हो अगर सामना | निराशा के भाव में, खोना न मुस्कान को || जिन्दा रखना ख्वाब, लक्ष्य बनाकर आँखों में | जैसे हो धड़कन कोई, जिन्दा तेरी साँसों में || ज़िन्दगी के सफ़र में, आयेंगे ऐसे मोड़ भी | छीन लेंगे तुमसे ‘दीप’, तुम्हारी पहचान को   || बहते रहना नदियों सा, सागर को पाने तुम | याद रखेगी दुनिया,   तुम्हारे इस मिलान को ||

जनसंख्या की रफ़्तार घटे तो बात बने

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  भौगोलिक क्षेत्रफल की दृष्टि से 7 वां स्थान रखने वाला भारत आज दुनिया का सर्वाधिक जनसँख्या वाला देश बन चुका है | विश्व का हर छठां व्यक्ति भारतीय है जो हमें गर्वान्वित करने का अवसर देता है क्योंकि मानव संसाधन के रूप में हमारे पास एक ऐसी पूंजी है जो हमें विश्व के अन्य विकासशील देशों से अलग करती है विशेष रूप से सर्वाधिक युवा प्रतिनिधित्व एक सुखद एवं समृद्ध भविष्य का संकेत देता है | पड़ोसी देश चीन की तुलना में हमारे पास अधिक युवा शक्ति है जो विकसित भारत के रथ को गति प्रदान कर सकती है | हालाँकि वर्तमान समय में कौशल एवं तकनीकि दृष्टि से उपलब्ध भारतीय मानव संसाधन वैश्विक बाजार में उपलब्ध अवसरों को अपने पक्ष में कर पायेगा, संदेह पैदा करता है | इसके पीछे तेजी से बढ़ती जनसंख्या एवं उपलब्ध संसाधनों के बीच लगातार बढ़ रही असमानता को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है | रोजगार सृजन के सभी प्रयास जनसंख्या बृद्धि के समक्ष अत्यंत कम पड़ रहे हैं जिससे उपलब्ध मानव संसाधन की सक्रीय सहभागिता सुनिश्चित करना कठिन होता जा रहा है | सरकार जब तक 1 करोड़ रोजगार सृजित करती है, जनसंख्या 10 करोड़ अथवा उससे अधिक बढ़ जाती ...